17 APR 2016 KAMADA/FALDA EKADASHI

कामदा एकादशी व्रत (Kamada Ekadashi Vrat)

by ACHARYA SHASHIKANT on DECEMBER 24, 2008 · 13 COMMENTS

in FESTIVALS


कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi) जिसे फलदा एकादशी (Falda Ekadashi) भी कहते हैं, श्री विष्णु का उत्तम व्रत कहा गया है। इस व्रत के पुण्य से जीवात्मा को पाप से मुक्ति मिलती है। यह एकादशी कष्टों का निवारण करने वाली और मनोनुकूल फल देने वाली होने के कारण फलदा (falda) और कामना kamna) पूर्ण करने वाली होने से कामदा (kamada) कही जाती है। इस एकादशी की कथा श्री कृष्ण ने पाण्डु पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। इससे पूर्व राजा दिलीप को वशिष्ठ मुनि ने सुनायी थी। आइये हम भी इस एकादशी की पुण्य कथा का श्रवण करें।

कामदा एकादशी कथा: (Kamada Ekadashi Vrat katha)

पुण्डरीक नामक नाग का राज्य अत्यंत वैभवशाली एवं सम्पन्न था। उस राज्य में गंधर्व, अप्सराएं एवं किन्नर भी रहा करते थे। इस राज्य में ललिता नामक अति सुन्दर अप्सरा और ललित नामक श्रेष्ठ गंधर्व का वास था। ये दोनों पति पत्नी थे। इनके बीच अगाध प्रेम की धारा बहती थी। दोंनों में इस कदर प्रेम था कि वे सदा एक दूसरे का ही स्मरण किया करते थे, संयोगवश एक दूसरे की नज़रों के सामने नहीं होते तो विह्वल हो उठते। इसी प्रकार की घटना उस वक्त घटी जब ललित महाराज पुण्डरीक के दरबार में उपस्थित श्रेष्ठ जनों को अपने गायन और नृत्य से आनन्दित कर रहा था।

गायन और नृत्य करते हुए ललित को अपनी पत्नी ललिता का स्मरण हो आया जिससे गायन और नृत्य में वह ग़लती कर बैठा। सभा में कर्कोटक नामक नाग भी उपस्थित था जिसने महाराज पुण्डरीक को ललित की मनोदशा एवं उसकी गलती बदा दी। पुण्डरीक इससे अत्यंत क्रोधित हुआ और ललित को राक्षस बन जाने का श्राप दे दिया।

ललित के राक्षस बन जाने पर ललिता अत्यंत दु:खी हुई और अपने पति को श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए यत्न करने लगी। एक दिन एक मुनि ने ललिता की दु:खद कथा सुनकर उसे कामदा एकादशी का व्रत करने का परामर्श दिया। ललिता ने उसी मुनी के आश्रम में एकादशी व्रत का पालन किय और द्वादशी के दिन व्रत का पुण्य अपने पति को दे दिया। व्रत के पुण्य से ललित पहले से भी सुन्दर गंधर्व रूप में लट आया।

व्रत विधि: (Kamada Ekadashi Vrat Vidhi)

एकादशी के दिन स्नानादि से पवित्र होने के पश्चात संकल्प करके श्री विष्णु के विग्रह की पूजन करें। विष्णु को फूल, फल, तिल, दूध, पंचामृत आदि नाना पदार्थ निवेदित करें। आठों प्रहर निर्जल रहकर विष्णु जी के नाम का स्मरण एवं कीर्तन करें। एकादशी व्रत में ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा का बड़ा ही महत्व है अत: ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा सहित विदा करने के पश्चात ही भोजना ग्रहण करें। इस प्रकार जो चैत्र शुक्ल पक्ष में एकादशी का व्रत रखता है उसकी कामना पूर्ण होती है।

Kamada Ekadashi is the first Ekadashi in a Hindu year and considered to be the most auspicious among all the Ekadashi rituals. Also known as Kamda Ekadashi, this Ekadashi falls in the month of Chaitra. Now let’s perform Kamada Ekadashi Vrat Katha.

1. Let’s listen to Kamada Ekadashi katha and information about the event.

2. We will do the aarti

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STEP 1: Let’s do Kamada Ekadashi Katha.

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STEP 2: WE WILL CONCLUDE WITH THE AARTI

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Mantras, regional information, food restrictions

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Ekadasi  is a monthly fasting dedicated to Lord Vishnu and is observed on the 11th day of a lunar fortnight. Ekadasi December 2015 dates are December 7 and December 21. The famous Vaikunta Ekadasi/Mukkoti Ekadasi is on December 21,2015 and Sayana Ekadasi/Ashadi Ekadasi is on July 15, 2016 in South India especially observed in Tirumala, Bhadrachalam Sri Rama Temple, Srirangam and other Vishnu temples is on December 21, 2015.This is one of the most popular Vrat observed in Hinduism. How to observe Ekadasi was narrated to Arjuna by Lord Krishna and is found in the Bhavisyottara Purana.

When to start Ekadasi Fasting?

Lord Krishna advices Arjuna to begin the Ekadasi fasting in the autumn season with Utpanna or Uttpatti Ekadasi occurring during the waning phase of the moon in November – December.The Ekadasi on December 7, 2015 is known as Utpanna Ekadasi and it is from this Ekadasi most people begin the next cycle of Ekadasi Fasting.

Ekadasi Vrat Fasting Method:

Ekadasi is the name of the Goddess that arose from Lord Vishnu to defeat Demon Mura. Happy with her divine act, Lord Vishnu blessed her that anyone who observes Ekadasi fast will be freed of their sins and will attain Moksha.Some people only take a single meal on the Dasami day, the day before Ekadasi.Fasting is for 24 hours. It is believed that a partial or total abstinence from food on Ekadasi is rewarded with bliss.If you have any health problem or are taking medicines, please consult your doctor before deciding on fasting. You can also opt for a partial fast by avoiding food made of rice.Do not eat food made from rice on Ekadasi. Strictly avoid eating rice and grains, honey, meat and eating on a bell metal plate. Do not apply oil on the day.Those taking partial fast can consume fruits and milk.

Things needed for Ekadasi Puja and Prayer:

  • A picture or photo or idol of Lord Vishnu.
  • Lamp
  • Dhoop Sticks.
  • Karpuram
  • Bell
  • Match Box.
  • Water
  • Flowers
  • Fruits
  • Coconut
  • Tulsi leaves (The tulsi leaves should not be picked on the day but on the previous day).
  • Rice mixed with turmeric Powder(akshata).
  • Kunkum
  • Turmeric powder.
  • Sandlewood powder.

Observance:

  • Wake up early in the morning.
  • Clean your house Properly.
  • Take head bath.
  • Arrange the puja Room.
  • Place Lord Vishnu Idol and Lord Ganesha’s Idol.
  • Apply gandham with kunkum.
  • Decorate with flowers.
  • Perform a simple puja to Lord Ganesha and Lord Vishnu by lighting a lamp,dhoop sticks and offering fruits and Tulsi leaves.
  • First start with OM GANESHAYA NAMAHA mantra.
  • Pray or meditate following mantras(OM NAMO NARAYANAYA,OM NAMO BHAGAVATE VASU DEVAYA NAMAHA) for few minutes.
  • Break the Coconut.
  • Sprinkle some water on
  • Give the Aarthi
  • If there is a Vishnu temple nearby visit the temple and witness morning pujas and rituals.
  • Complete fast or Upavas on the day is the main observance.

Afternoon:

  • Take bath and offer prayers to Lord Vishnu.

Evening:

  • Take a bath in the evening.
  • Repeat the morning puja to Vishnu
  • Visit Vishnu temple and witness the evening puja and rituals.

Prayers for Ekadashi:

  • Vishnu Ashotharam
  • Vishnu Sahasranamam
  • Simple Chanting of  Om Namo Narayana/Om Namo Bhagavte Vasudevaya Namaha/Hare Rama, Hare Rama, Rama Rama, Hare Hare ,Hare Krishna, Hare Krishna, Krishna Krishna,Hare Hare.
  • Sri Rama Rama Raamethi, Rame Raame Manorame,Sahasra Nama Thathulayam,Rama Naama Varaanane.
  • Or any prayers dedicated to Lord Vishnu or Sri Krishna.
  • No Sleep of Keeping Vigil at Night:

    • Staunch devotees who observe Ekadasi fasting do not sleep on the day. They spend the whole night at Vishnu temples or by singing prayers or listening stories dedicated to Lord Vishnu.
    • But those devotees who have health problems sleep at night. Those people who work, take rest at night and avoid keeping vigil at night.

    Next Day Morning(Dwadashi):

    • The fast is broken on the next day (Dwadashi) after taking bath. Offer prayers to Lord Vishnu by lighting a lamp and then you can break the fast.
    • The fasting comes to an end on the Dwadashi day with the consuming of food cooked in one’s house.
    • Below are the Ekadasi dates (2015-2016) are based on Indian Standard Time (IST).
    January 19, 2011 04:22 clockastrowriter2

    kamada_ekadashi

    कामदा एकदशी व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. वर्ष 2011 में 14 अप्रैल तिथि में यह व्रत किया जायेगा(In the Year 2011, Kamada Ekadashi fast will be observed on 14th April).  कामदा एकादशी अपने नाम के अनुरुप सभी कामनाओं की पूर्ति करती है. इस व्रत को करने से सभी पापों का नाश होता है. इस एकादशी के फलों के विषय में कहा जाता है, कि यह एकादशी ठिक उसी प्रकार फल देती है, जिस प्रकार अग्नि लकडी को जला देती है. यह भी व्यक्ति के पापों को समाप्त कर देती है. कामदा एकादशी के पुन्य प्रभाव से पाप नष्ट होते है, और संतान की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से परलोक में स्वर्ग की प्राप्ति होती है.

    कामदा एकादशी व्रत विधि | Kamada Ekadashi Vrat Vidhi

    चैत्र शुक्ल पक्ष कि एकादशी तिथि में इस व्रत को करने से पहले कि रात्रि अर्थात व्रत के पहले दिन दशमी को जौ, गेहूं और मूंग की दाल आदि का भोजन नहीं करना चाहिए(On the previous night of Kamada Ekadashi, i.e., the 10th date, things like Barley, Wheat and Moong Pulse should not be eaten.) भोजन में नमक का प्रयोग करने से भी बचना चाहिए. और दशमी तिथि में भूमि पर ही शयन करना चाहिए. इस व्रत की अवधि 24 घंटे की होती है. दशमी तिथि के दिन से ही व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए.

    एकादशी व्रत करने के लिये व्यक्ति को प्रात: उठकर, शुद्ध मिट्टी से स्नान करना चाहिए. स्नान करने के लिये तिल और आंवले के लेप का प्रयोग भी किया जा सकता है. मिट्टी और तिल एक लेप से स्नान करने के बाद, भगवान श्री विष्णु जी की पूजा करनी चाहिए. सबसे पहले धान्य रख कर, धान्यों के ऊपर मिट्टी या तांबें का घडा रखा जाता है. घडे पर लाल वस्त्र बांध कर, धूप, दीप से पूजन करना चाहिए. और भगवान कि पूजा धूप, दीप, पुष्प की जाती है.

    कामदा एकादशी व्रत कथा | Kamada Ekadashi Vrat Katha in Hindi

    पुराने समय में पुण्डरीक नामक राजा था, उसकी भोगिनीपुर नाम कि नगरी थी. उसके खजाने सोने चांदी से भरे रह्ते थे. वहां पर अनेक अप्सरा, गंधर्व आदि वास करते थें. उसी जगह ललिता और ललित नाम के स्त्री-पुरुष अत्यन्त वैभवशाली घर में निवास करते थें. उन दोनों का एक-दूसरे से बहुत अधिक प्रेम था. कुछ समय ही दूर रहने से दोनों व्याकुल हो जाते थें.

    एक समय राजा पुंडरिक गंधर्व सहित सभा में शोभायमान थे. उस जगह ललित गंधर्व भी उनके साथ गाना गा रहा था. उसकी प्रियतमा ललिता उस जगह पर नहीं थी. इससे ललित उसको याद करने लगा. ध्यान हटने से उसके गाने की लय टूट गई. यह देख कर राजा को क्रोध आ गया. ओर राजा पुंडरीक ने उसे श्राप दे दिया. मेरे सामने गाते हुए भी तू अपनी स्त्री का स्मरण कर रहा है. जा तू अभी से राक्षस हो जा, अपने कर्म के फल अब तू भोगेगा.

    राजा पुण्डरीक के श्राप से वह ललित गंधर्व उसी समय विकराल राक्षस हो गया, उसका मुख भयानक हो गया. उसके नेत्र सूर्य, चन्द्र के समान लाल होने लग��ं. मुँह से अग्नि निकलने लगी. उसकी नाक पर्वत की कन्दरा के समान विशाल हो गई. और गर्दन पहाड के समान लगने लगी. उसके सिर के बाल पर्वत पर उगने वाले वृ्क्षों के समान दिखाई देने लगे़. उस की भुजायें, दो-दो योजन लम्बी हो गई. इस तरह उसका आठ योजन लम्बा शरीर हो गया. राक्षस हो जाने पर उसकों महान दु:ख मिलने लगा और अपने कर्म का फल वह भोगने लगा.

    अपने प्रियतम का जब ललिता ने यह हाल देख तो वह बहुत दु;खी हुई. अपने पति के उद्वार करने के लिये वह विचार करने लगी. एक दिन वह अपने पति के पीछे घूमते-घूमते विन्धाजल पर्वत पर चली गई. उसने उस जगह पर एक ऋषि का आश्रम देखा. वह शीघ्र ही उस ऋषि के सम्मुख गई. और ऋषि से विनती करने लगी.

    उसे देख कर ऋषि बोले की हे कन्या तुम कौन हो, और यहां किसलिये आई हों, ललिता बोली, हे मुनि, मैं गंधर्व कन्या ललिता हूं, मेरा पति राजा पुण्डरीक के श्राप से एक भयानक राक्षस हो गया है. इस कारण मैं बहुत दु:खी हूं. मेरे पति के उद्वार का कोई उपाय बताईये.

    इस पर ऋषि बोले की हे, गंधर्व कन्या शीघ्र ही चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी आने वाली है. उस एकादशी के व्रत का पालन करने से, तुम्हारे पति को इस श्राप से मुक्ति मिलेगी. मुनि की यह बात सुनकर, ललिता ने आनन्द पूर्वक उसका पालन किया. और द्वादशी के दिन ब्राह्मणों के सामने अपने व्रत का फल अपने पति को दे दिया, और भगवान से प्रार्थना करने लगी.

    हे प्रभो, मैनें जो यह व्रत किया है, उसका फल मेरे पति को मिलें, जिससे वह इस श्राप से मुक्त हों. एकादशी का फल प्राप्त होते ही, उसका पति राक्षस योनि से छुट गया. और अपने पुराने रुप में वापस आ गया. इस प्रकार इस वर को करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते है.

    • Ekadasi 2015
      December 7, 2015 –   Uttpatti Ekadasi.December 21, 2015 –  Mokshada Ekadasi – Vaikunta Ekadasi.
    • Ekadashi 2016January 5, 2016 –     Saphala Ekadasi (In most regions).
      January 6, 2016 – Ekadasi fasting (In Western Parts of India) (Athirkta Ekadasi)
      January 20, 2016 – Putrada Ekadasi.February 4, 2016 – Shattila Ekadasi.
      February 18, 2016 – Jaya Ekadasi and Bheeshma Ekadasi.March 5, 2016 – Vijaya Ekadasi.
      March 19, 2016 –Amalaki Ekadassi.April 3, 2016 –Papmochani Ekadasi.
      April 17, 2016 – Kamada Ekadasi.
      May 3, 2016 – Varithini Ekadasi.
      May 17, 2016 –  Mohini Ekadasi.
      June 1, 2016 – Apara Ekadasi.
      June 16, 2016 – Bhim Ekadasi – Bhima Nirjala Ekadasi.
      June 30, 2016 – Yogini Ekadasi – Smarta Ekadasi.
      July 1, 2016 – Yogini Ekadasi – Bhagvath in most regions.
      July 15, 2016 – Devshayani Ekadasi – Sayana Ekadasi-Ashadi Ekadasi.
      July 30, 2016 – Kamika Ekadasi.
      August 14, 2016 – Pavitra Ekadasi – Putrada Ekadasi.
      August 28, 2016 – Aja Ekadasi – Annada Ekadashi – Jaya Ekadasi
      September 13, 2016 – Parivartini Ekadasi.
      September 26, 2016 – Indira Ekadasi.
      October 12, 2016 – Pasankusa Ekadasi.
      October 26, 2016 – Rama Ekadasi.
      November 10, 2016 – Smarta Ekadasi.
      November 11, 2016 – Prabodini Ekadasi – Uttahana Ekadasi.

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