16 JUN 2016 GAYATRI JAYANTI

Gayatri Jayanti 2015

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Origin

Gayatri Jayanti is the day of appearance of Goddess Gayatri, who is the personification of divine knowledge. It is a festival celebrated by Hindus all around the world. This year Gayatri Jayanti falls on 28th May, which is the day of Jyestha Shukla Paksha Ekadashi.

Significance of Gayatri Jayanti

1. Also known as Veda Mata, her four heads represent the Vedas, and her fifth symbolizes the almighty.

2. Gayatri Mata has been widely revered by Hindus since the Vedic times, and the Gayatri Mantra is one of the main mantras of Hinduism.

3. According to legend, the sage Vishvamitra had revealed the Gayatri Mantra to the world on the auspicious day of Gayatri Jayanti.

4. She had arrived on earth with divine knowledge at a time when society was ignorant and disorderly. Vedic society was then enlightened by the supreme knowledge of the Vedas.

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Gayatri Jayanti

As per the mythological beliefs it is said that Goddess Gayatri made her appearance on the 11th day of the Shukla Paksha of the Jyeshta month.

Many people accept her as the mother of all Gods and some believe that she is the culmination of three Gods, namely- Laxmi, Parvati and Saraswati. Scholars also indicate that Sage Vishwamitra first uttered the Gayatri Mantra on the Jyeshta Shukla Ekadashi day. And from then on this day is observed as Gayatri Jayanti day.

It is said that she appeared to remove ignorance existent amongst the people. And to do so she appeared in the form of knowledge. Later on, this knowledge was spread out to the whole world by Sage Vishwamitra. Regarding Goddess Gayatris marriage to Lord Brahma the story runs that Brahma married her when his first wife Sabitri was late for a yagna. And Brahma had to start the yagna with his wife at time. Thus, in Sabitris absence he married Gayatri to start the yagna People offer special prayers and pujas to Gayatri Mata on this day. This day of worship is a community affair and people from different walks of life gather to offer their respect and devotion in the form of prayers a pujas.

These pujas are done either by Pandits or by elderly experienced persons. Satsangs are also organized in this day and the Gayatri Mantra is chanted by all the people. Such is the importance and significance of Gayatri mantra that if one chants the Gayatri mantra then no other mantras are needed to be chanted because this mantra is highly sacred.

To get the best results from the Gayatri mantra one needs to recite it thrice a day, preferably in the morning, afternoon and evening. It is believed that if one chants the Gayatri mantra incessantly then that person would not face the miseries and hardships of life. The mythological stories state that Goddess Gayatri, who is considered as the Mother of all Vedas has ten hands and five heads.

The ten hands of Goddess Gayatri are said to bear the symbols of Lord Vishnu and her five heads represents the four Vedas and the fifth one symbolizes the almighty itself. She is seen as sitting on a lotus flower

गायत्री मंत्र का जाप करने से उत्साह एवं सकारात्मकता से आपकी त्वचा में चमक आती है, तामसिकता से घृणा, और परमार्थ में रूचि जागती है, पूर्वाभास होने लगता है, आशीर्वाद देने की शक्ति बढ़ती है, नेत्रों में तेज आता है, स्वप्न सिद्ध हो जाते हैं, क्रोध शांत होता है, ज्ञान की वृद्धि होती है।

पंडित ‘विशाल’ दयानंद शास्‍त्री बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति जीवन की समस्याओं से बहुत त्रस्त है तो उसकी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। वह पीपल, शमी, वट, गूलर, पाकर की समिधाएं लेकर एक पात्र में कच्चा दूध भरकर रख लें एवं उस दूध के सामने एक हजार गायत्री मंत्र का जाप करें। इसके बाद एक-एक समिधा को दूध में स्पर्श करा कर गायत्री मंत्र का जप करते हुए अग्रि में होम करने से समस्त परेशानियों एवं दरिद्रता से मुक्ति मिल जाती है।

विद्यार्थीयों के लिए: गायत्री मंत्र का जप सभी के लिए उपयोगी है किंतु विद्यार्थियों के लिए तो यह मंत्र बहुत लाभदायक है। रोजाना इस मंत्र का एक सौ आठ बार जप करने से विद्यार्थी को सभी प्रकार की विद्या प्राप्त करने में आसानी होती है। विद्यार्थियों को पढऩे में मन नहीं लगना, याद किया हुआ भूल जाना, शीघ्रता से याद न होना आदि समस्याओं से निजात मिल जाती है।

दरिद्रता के नाश के लिए : यदि किसी व्यक्ति के व्यापार, नौकरी में हानि हो रही है या कार्य में सफलता नहीं मिलती, आमदनी कम है तथा व्यय अधिक है तो उन्हें गायत्री मंत्र का जप काफी फायदा पहुंचाता है। शुक्रवार को पीले वस्त्र पहनकर हाथी पर विराजमान गायत्री माता का ध्यान कर गायत्री मंत्र के आगे और पीछे श्रीं सम्पुट लगाकर जप करने से दरिद्रता का नाश होता है। इसके साथ ही रविवार को व्रत किया जाए तो ज्यादा लाभ होता है।

संतान संबंधी परेशानियां दूर करने के लिए : किसी दंपत्ति को संतान प्राप्त करने में कठिनाई आ रही हो या संतान से दुखी हो अथवा संतान रोगग्रस्त हो तो प्रात: पति-पत्नी एक साथ सफेद वस्त्र धारण कर यौं बीज मंत्र का सम्पुट लगाकर गायत्री मंत्र का जप करें। संतान संबंधी किसी भी समस्या से शीघ्र मुक्ति मिलती है।

पढ़ें : कुछ इस तरह कीजिए मां गायत्री की उपासना

शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए : यदि कोई व्यक्ति शत्रुओं के कारण परेशानियां झेल रहा हो तो उसे प्रतिदिन या विशेषकर मंगलवार, अमावस्या अथवा रविवार को लाल वस्त्र पहनकर माता दुर्गा का ध्यान करते हुए गायत्री मंत्र के आगे एवं पीछे क्लीं बीज मंत्र का तीन बार सम्पुट लगाकार एक सौ आठ बार जाप करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। मित्रों में सद्भाव, परिवार में एकता होती है तथा न्यायालयों आदि कार्यों में भी विजय प्राप्त होती है।

विवाह कार्य में देरी हो रही हो तो : यदि किसी भी जातक के विवाह में अनावश्यक देरी हो रही हो तो सोमवार को सुबह के समय पीले वस्त्र धारण कर माता पार्वती का ध्यान करते हुए ह्रीं बीज मंत्र का सम्पुट लगाकर एक सौ आठ बार जाप करने से विवाह कार्य में आने वाली समस्त बाधाएं दूर होती हैं। यह साधना स्त्री पुरुष दोनों कर सकते हैं।

पढ़ें : वेदों से हुई उत्पत्ति इसलिए हैं वेदमाता

यदि किसी रोग के कारण परेशानियां हों तो : यदि किसी रोग से परेशान है और रोग से मुक्ति जल्दी चाहते हैं तो किसी भी शुभ मुहूर्त में एक कांसे के पात्र में स्वच्छ जल भरकर रख लें एवं उसके सामने लाल आसन पर बैठकर गायत्री मंत्र के साथ ऐं ह्रीं क्लीं का संपुट लगाकर गायत्री मंत्र का जप करें। जप के पश्चात जल से भरे पात्र का सेवन करने से गंभीर से गंभीर रोग का नाश होता है। यही जल किसी अन्य रोगी को पीने देने से उसके भी रोग का नाश होता हैं।

रोग निवारण के लिए: किसी भी शुभ मुहूर्त में दूध, दही, घी एवं शहद को मिलाकर एक हजार गायत्री मंत्रों के साथ हवन करने से चेचक, आंखों के रोग एवं पेट के रोग समाप्त हो जाते हैं। इसमें समिधाएं पीपल की होना चाहिए। गायत्री मंत्रों के साथ नारियल का बुरा एवं घी का हवन करने से शत्रुओं का नाश हो जाता है। नारियल के बुरे मे यदि शहद का प्रयोग किया जाए तो सौभाग्य में वृद्धि होती हैं।

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गायत्री मंत्र के जप से मिलते हैं ये लाभ

गायत्री मंत्र का जप सभी के लिए उपयोगी है किंतु विद्यार्थियों के लिए तो यह मंत्र बहुत लाभदायक है।

Wed, 24 Jun 2015 01:02 PM (IST)

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कुछ इस तरह कीजिए मां गायत्री की उपासना

तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त के कुछ देर पहले मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए।

Thu, 28 May 2015 07:03 PM (IST)

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इसीलिए कलयुग में अमृत की तरह है गायत्री मंत्र

आत्म- प्राप्ति करने की दिव्य दृष्टि जिस बुद्धि से प्राप्त होती है, उसकी प्रेरणा गायत्री द्वारा होती है।

Thu, 28 May 2015 07:02 PM (IST)

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पांचवे वेद से जानिए मां गायत्री मंत्र की महिमा

इस ग्रन्थ को हिन्दू धर्म में पंचम वेद माना जाता है।

Thu, 28 May 2015 07:02 PM (IST)

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यह मंत्र है जगत की आत्मा, मानते हैं अनेक धर्म संप्रदाय

तत्त्वदर्शी ऋषियों ने कहा है दुर्लभा सर्वमंत्रेषु गायत्री प्रणवान्विता अर्थात्- प्रणव (ऊं) से युक्त गायत्री सभी मन्त्रों में दुर्लभ है।

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जानिए गायत्री मंत्र के जप से जुड़ी जरूरी बातें

यह मंत्र निरोगी जीवन के साथ-साथ यश, प्रसिद्धि, धन व ऐश्वर्य देने वाली होती है।

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गायत्री मंत्र जैसा ही इस्लाम धर्म में सूरह फातेह

जरूरत यही है कि कर्मकाण्ड के कलेवर के साथ गायत्री विद्या के प्राण को भी जाग्रत् किया जाए।

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वेदों से हुई उत्पत्ति इसलिए हैं वेदमाता

हिंदू धर्म में मां गायत्री को वेदमाता कहा जाता है अर्थात सभी वेदों की उत्पत्ति इन्हीं से हुई है।

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गायत्री जयंती

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को देवी गायत्री का अवतरण माना जाता है। इस दिन को गायत्री जयंती के रूप में मनाते हैं।

Thu, 21 May 2015 03:00 PM (IST)

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